नीलकंठ पक्षी की कहानी
नीलकंठ पक्षी की कहानी नीलकंठ पक्षी से जुड़ी एक प्रसिद्ध कहानी है, जो भगवान शिव से संबंधित है। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान, जब देवताओं और दानवों ने समुद्र को मथा, तो उसमें से हलाहल विष निकला। इस विष से पूरा संसार नष्ट होने लगा, तब भगवान शिव ने उस विष को पी लिया। शिव ने विष को गले में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला हो गया और उन्हें 'नीलकंठ' कहा जाने लगा। इसी तरह, नीलकंठ पक्षी का भी गला नीला होता है, और इसे शुभ माना जाता है। भारत में नीलकंठ पक्षी को देखने पर लोग इसे भगवान शिव का आशीर्वाद मानते हैं। खासकर दशहरे के दिन, नीलकंठ को देखना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस पक्षी को भारत में खास सम्मान और प्रेम दिया जाता है, क्योंकि यह धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नीलकंठ (Indian Roller) एक सुंदर और रंग-बिरंगा पक्षी है, जिसे हिंदी में "नीलकंठ" कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Coracias benghalensis है। नीलकंठ के पंख नीले और भूरे रंग के होते हैं, और जब यह उड़ता है, तो उसके पंखों का चमकीला नीला रंग बहुत ही आकर्षक लगता है। नीलकंठ का रहन-सहन: नीलकंठ भार...