संख्यात्मक पद्धति (Number System) और इसके प्रकार

संख्यात्मक पद्धति (Number System) और इसके प्रकार

संख्यात्मक पद्धति (Number System) वह प्रणाली है जिसके माध्यम से संख्याओं को प्रदर्शित और गणना की जाती है। यह कंप्यूटर और गणित में उपयोग किए जाने वाले अंकों (Digits) का एक सेट होता है। कंप्यूटर केवल 0 और 1 (बाइनरी) भाषा को समझता है, लेकिन विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग संख्या प्रणालियाँ प्रयोग की जाती हैं।

संख्यात्मक पद्धति को मुख्य रूप से चार प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

  1. दशमलव संख्या पद्धति (Decimal Number System - Base 10)
  2. द्विआधारी संख्या पद्धति (Binary Number System - Base 2)
  3. अष्टाधारी संख्या पद्धति (Octal Number System - Base 8)
  4. षोडशाधारी संख्या पद्धति (Hexadecimal Number System - Base 16)



1. दशमलव संख्या पद्धति (Decimal Number System - Base 10)

दशमलव प्रणाली सबसे अधिक प्रचलित संख्या प्रणाली है, जिसे हम रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते हैं। इसमें 0 से 9 तक के 10 अंक होते हैं।

आधार (Base): 10
उपयोग: सामान्य गणना, वित्तीय गणना, मापन, आदि।

उदाहरण:

  • 143, 56, 2989, 875.45

👉 संख्या 357 को दशमलव पद्धति में ऐसे लिखा जाता है:

(3×102)+(5×101)+(7×100)=300+50+7=357(3 × 10^2) + (5 × 10^1) + (7 × 10^0) = 300 + 50 + 7 = 357

2. द्विआधारी संख्या पद्धति (Binary Number System - Base 2)

यह कंप्यूटर की भाषा है, जिसमें केवल दो अंक (0 और 1) होते हैं। कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल (ON/OFF) के माध्यम से डेटा प्रोसेस करता है, इसलिए बाइनरी सिस्टम का उपयोग किया जाता है।

आधार (Base): 2
उपयोग: कंप्यूटर, डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिक गेट्स।

उदाहरण:

  • 1010₂, 1101₂, 10011₂

👉 संख्या (1011)₂ को दशमलव में बदलना:

(1×23)+(0×22)+(1×21)+(1×20)(1 × 2^3) + (0 × 2^2) + (1 × 2^1) + (1 × 2^0) =(8+0+2+1)=1110= (8 + 0 + 2 + 1) = 11₁₀

3. अष्टाधारी संख्या पद्धति (Octal Number System - Base 8)

इस प्रणाली में 0 से 7 तक के 8 अंक (0,1,2,3,4,5,6,7) होते हैं। यह बाइनरी संख्या प्रणाली को सरल बनाने के लिए उपयोग की जाती है।

आधार (Base): 8
उपयोग: कंप्यूटर शॉर्टहैंड, माइक्रोप्रोसेसर कोडिंग।

उदाहरण:

  • 25₈, 73₈, 157₈

👉 संख्या (157)₈ को दशमलव में बदलना:

(1×82)+(5×81)+(7×80)(1 × 8^2) + (5 × 8^1) + (7 × 8^0) =(1×64)+(5×8)+(7×1)=64+40+7=11110= (1 × 64) + (5 × 8) + (7 × 1) = 64 + 40 + 7 = 111₁₀

4. षोडशाधारी संख्या पद्धति (Hexadecimal Number System - Base 16)

इस प्रणाली में 16 अंक होते हैं:
0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, A (10), B (11), C (12), D (13), E (14), F (15)।
यह बड़ी बाइनरी संख्याओं को संक्षेप में लिखने के लिए उपयोग की जाती है।

आधार (Base): 16
उपयोग: कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, कलर कोडिंग (HTML, CSS), मैमोरी एड्रेसिंग।

उदाहरण:

  • 2F₁₆, A3₁₆, 7D₁₆

👉 संख्या (2F)₁₆ को दशमलव में बदलना:

(2×161)+(F×160)(2 × 16^1) + (F × 16^0) =(2×16)+(15×1)=32+15=4710= (2 × 16) + (15 × 1) = 32 + 15 = 47₁₀

संख्यात्मक पद्धतियों के बीच रूपांतरण (Conversion Between Number Systems)

रूपांतरण विधि
दशमलव → बाइनरी संख्या को 2 से बार-बार भाग देकर शेष (Remainder) लिखें।
बाइनरी → दशमलव प्रत्येक अंक को उसके स्थान के भार (Weight) के अनुसार 2 के घात से गुणा करें।
दशमलव → अष्टाधारी संख्या को 8 से बार-बार भाग देकर शेष लिखें।
अष्टाधारी → दशमलव प्रत्येक अंक को 8 के घात से गुणा करें।
दशमलव → हेक्साडेसिमल संख्या को 16 से बार-बार भाग देकर शेष लिखें।
हेक्साडेसिमल → दशमलव प्रत्येक अंक को 16 के घात से गुणा करें।

निष्कर्ष

संख्यात्मक पद्धति कंप्यूटर और गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दशमलव प्रणाली का उपयोग दैनिक जीवन में, द्विआधारी प्रणाली का उपयोग कंप्यूटर में, अष्टाधारी प्रणाली का उपयोग शॉर्टहैंड नोटेशन में और षोडशाधारी प्रणाली का उपयोग प्रोग्रामिंग व डिजिटल डिजाइनिंग में किया जाता है। यदि आप कंप्यूटर साइंस या गणित में रुचि रखते हैं, तो इनका ज्ञान बहुत आवश्यक है। ✅💻📊

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